खातेदार/सहखातेदार कृषकों के लिए संचालित कृषक दुर्घटना बीमा योजना

  1. कृषक की परिभाषा - कृषक का तात्पर्य राजस्व अभिलेखों अर्थात् खतौनी में दर्ज खातेदार/सहखातेदार से है, जिसकी आयु 12 वर्ष से 7० वर्ष के मध्य हो|
  2. बीमा आवरण की अवधि - बीमा आवरण की अवधि अनुबन्ध की तिथि से एक वर्ष के लिये होगी।
  3. बीमा आवरण की धनराशि - बीमा आवरण अधिकतम रू० 5,00,000 (रु० पाँच लाख) का होगा| बीमा के प्रीमियम की राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जायेगी ।
  4. बीमा धारक की मृत्यु यदि आग, बाढ, बिजली गिरने, करेन्ट लगने, सॉप काटने एवं जीव जन्तु काटने/मारने, नदी, तालाब, पोखर व कुंए में डूबने, मकान गिरने, वाहन दुर्घटना, डकैती, दंगा मारपीट तथा आतंकवादी घटना आदि अप्राकृतिक कारणों अथवा किसी अन्य प्रकार की दुर्घटना से होती है तो उसे बीमा का लाभ अनुमन्य होगा| अप्राकृतिक मृत्यु के प्रकार, प्रकृति इत्यादि के सम्बन्ध में इन्श्योरेन्स बीमा कम्पनी द्वारा कोई विवाद उठाये जाने पर सम्बन्धित जिलाधिकारी का निर्णय अन्तिम व बाध्यकारी होगा|
  5. उक्त के अतिरिक्त बीमा धारक की मृत्यु यदि आत्महत्या या गम्भीर अपराधिक कार्य करते समय होती है तो इस दशा में बीमा का लाभ अनुमन्य नहीं होगा ।
  6. दुर्घटना के फलस्वरूप बीमा धारक को हुई शारीरिक अक्षमता (Physical Disability) के प्रति बीमा आवरण का लाभ दिया जायेगा|
  7. बीमा योजना के अन्तर्गत दावे का भुगतान निम्नानुसार किया जायेगा:-
    क्र.सं. दुर्घटना के कारण मृत्यु (शारीरिक क्षति की स्थिति) बीमादेय धनराशि
    1 मृत्यु तथा पूर्ण शारीरिक अक्षमता की स्थिति 100 प्रतिशत
    2 दोनों हाथ अथवा दोनों पैर अथवा दोनों आँखों की क्षति 100 प्रतिशत
    3 एक हाथ तथा एक पैर की क्षति 100 प्रतिशत
    4 एक हाथ या एक पैर या एक आँख की क्षति 50 प्रतिशत
    5 स्थायी अपंगता 50 प्रतिशत से अधिक होने पर 50 प्रतिशत
    6 स्थायी अपंगता 25 प्रतिशत से अधिक होने पर 25 प्रतिशत
  8. इस योजना के अन्तर्गत कृषकों को एक बीमा आच्छादन कार्ड दिया जायेगा, जिसमें कृषक दुर्घटना बीमा योजना का परिचय, उसकी शर्तें एवं अर्हता/प्रक्रिया के बारे में संक्षिप्त उल्लेख होगा| यह कार्ड प्रत्येक जनपद के जिलाधिकारी द्वारा अपने जनपद के समस्त खातेदारों /सहखातेदारों किसानों को उपलब्ध कराया जायेगा जो इस बीमा योजना से आच्छादित होंगे ।
  9. इस योजना से आच्छादित कृषक को किसी अन्य योजना में मिलने वाले लाभ का प्रभाव इस योजना पर नहीं पडेगा|
  10. दावा निबटाने तथा निष्पादन की प्रक्रिया:-

    खातेदार कृषकों की शारीरिक अक्षमता (Physical Disability) अथवा मृत्यु हो जाने की स्थिति में दावों के निस्तारण की प्रक्रिया निम्नवत होगी:-
    1. मृत्यु अथवा शारीरिक अक्षमता होने पर कृषक/बीमा धारक अथवा आश्रित द्वारा अधिकतम 4 माह की अवधि में बीमा दावा सभी निर्धारित प्रपत्र पूर्ण कराकर सम्बन्धित परगनाधिकारी/एस.डी.एम. अथवा सीधे जिलाधिकारी को प्रस्तुत किया जायेगा, यदि 4 माह के बाद परन्तु 1 वर्ष के अन्दर बीमा दावा प्रस्तुत किया जाता है तो विलम्ब को क्षमा करने का अधिकार जिलाधिकारी को होगा। बीमा प्रपत्र प्राप्त होने पर सम्बन्धित जिलाधिकारी द्वारा बीमा कम्पनी को अधिकतम 3 सप्ताह में बीमा प्रपत्रों को तैयार कर व अन्य औपचारिकताएं पूर्ण कराकर संस्तुति सहित प्रेषित किया जायेगा| जिलाधिकारी द्वारा बीमा कम्पनी को बीमा प्रपत्र भेजते समय धनराशि प्राप्त करने वाले का बैंक का नाम, खाता नम्बर एव IFSC कोड भी बीमा कंपनी को उपलब्ध करा दिया जाये और बीमा कम्पनी इसी खाते में सीधे इलेक्ट्रानिकली धनराशि का भुगतान करें‍‌| अपरिहार्य कारणोंवश उपर्युक्त प्रक्रिया पूर्ण न होने पर बिन्दु-8 में उल्लिखित प्रक्रिया के अनुसार बीमा की धनराशि का चेक बीमा कम्पनी द्वारा सम्बन्धित जिलाधिकारी को सम्बन्धित व्यक्ति के खाते मे उपलब्ध कराने हेतु भेजा जाये ।
    2. दावे के साथ मृतक/शारीरिक रूप से अपंग हुए कृषक के खातेदार होने की पुष्टि में खतौनी प्रमाण-पत्र के रूप मे संलग्न की जायेगी |
    3. कृषक को मृत्यु की दशा में मृत्यु प्रमाण-पत्र, विधिक वारिस का प्रमाण-पत्र, प्राप्त कर दावे के साथ संलग्न किया जायेगा| खतौनी में कृषक की निर्विवाद विरासत का अंकन ही विधिक वारिस प्रमाण-पत्र के रूप में मान्य होगा| केवल ऐसे मामले जो कि विवादित हों उनमें न्याय पालिका से प्राप्त उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र मान्य होगा |
    4. पोस्टमार्टम रिपोर्ट की आवश्यकता उन मामलों में नहीं होगी जिसमें बाढ से बह जाने के कारण मृत शरीर बरामद न हो पाये|
    5. खातेदार कृषक की शारीरिक अपंगता की दशा में स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सक का प्रमाण-पत्र तथा निजी चिकित्सक द्वारा प्रमाण-पत्र दिये जाने की स्थिति में स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी द्वारा अथवा जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा उसे प्रतिहस्ताक्षरित करना होगा| यह दायित्व सम्बंधित तहसीलदार / उप जिलाधिकारी का होगा|
    6. बीमा धारक/आश्रित द्वारा संस्तुति करते समय खातेदार कृषक अथवा उसके विधिक वारिस का बैंक का नाम तथा खाता नम्बर भी दिया जायेगा|
    7. बीमा दावे का भुगतान दावा प्रपत्र प्राप्त होने पर अधिकतम 1 माह के अन्दर सम्बन्धित बीमा कम्पनी को करना होगा| यदि उस अवधि के दौरान बीमा दावा प्रपत्र अपूर्ण पाया जाता है अथवा अन्य कोई जांचोपरान्त आपत्ति लगायी जाती है ऐसे बीमा दावों को पुन: सम्बन्धित जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति के समक्ष आगामी दो सप्ताह में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जायेगा। इस समिति में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सम्बन्धित परगनाधिकारी तथा बीमा कम्पनी के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में नामित रहेंगे| प्रश्नगत समिति ऐसे बीमा दावों के सम्बन्ध में दो सप्ताह में परीक्षण करते हुये और/अथवा प्रपत्रों को आवश्यकतानुसार पूर्ण करते हुए निर्णय लेगी| समिति द्वारा लिया गया निर्णय अन्तिम तथा बीमा कम्पनियों को मान्य होगा तथा अधिकतम 15 दिनों में बीमा कम्पनी द्वारा धारक/कृषक को बीमा धनराशि का भुगतान करना होगा|
    8. बीमा की धनराशि का चेक सम्बन्धित्त जिलाधिकारी को भेजा जायेगा जो सम्बन्धित खातेदार कृषक अथवा मृत्यु की स्थिति में उसके विधिक वारिस को 15 दिनों में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे|
  11. पेनाल्टी

    1. उपर्युक्त प्रस्तर- 10 के अनुसार निर्धारित समय सीमा के अन्तर्गत भुगतान न किये जाने पर बीमा कम्पनी को प्रति दावा प्रति सप्ताह र 5,०००/- (रु. पाँच हजार रूपये मात्र) का भुगतान करना होगा ।
    2. जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति अगर यह पाती है कि कम्पनी अपर्याप्त अथवा अनौचित्त्यपूर्ण आधारों पर बीमा दावा अस्वीकृत करती है तो कम्पनी पर प्रति बीमा र 5,००,०००/- (रू. पाँच लाख मात्र) पेनाल्टी लगायी जायेगी|
    3. दावों के अपर्याप्त अथवा अनौचित्यपूर्ण आधारों पर दावा अस्वीकृत होने पर अन्तिम निर्णय सम्बन्धित्त जिला के जिलाधिकाऱी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जायेगा|